
संतनु कुमार कुर्रे की रिपोर्ट बिलासपुर
“1 घंटे का नोटिस… फिर बुलडोजर कार्रवाई! तहसीलदार राजेंद्र भारत पर सत्ता पक्ष के दबाव में कार्रवाई का आरोप
”
बिलासपुर जिले के बिल्हा क्षेत्र में प्रशासन की बेदखली कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सड़क किनारे वर्षों से फल दुकान संचालित कर रहे दुकानदारों ने आरोप लगाया है कि तहसीलदार राजेंद्र भारत के द्वारा मात्र 1 घंटे पहले नोटिस देकर जेसीबी के साथ तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी गई।
दुकानदारों का कहना है कि NHAI द्वारा पहले जिस हिस्से को खाली करने कहा गया था, उसे उन्होंने पहले ही छोड़ दिया था और पीछे हटकर दुकान संचालित कर रहे थे। उनका दावा है कि करीब 60 वर्षों से यही उनका जीवन यापन का साधन है और इसी के सहारे परिवार पल रहा है।
पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि 28 मार्च को दोपहर 1 बजे नोटिस दिया गया और 2 बजे जेसीबी पहुंचाकर कार्रवाई शुरू कर दी गई। महिलाओं ने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों और सामान हटाने तक का समय नहीं दिया गया।
दुकानदारों के वकील ने बताया कि सभी पक्षकार तहसीलदार न्यायालय में जवाब प्रस्तुत कर चुके थे और कुछ लोगों को इसी भूमि मामले में स्टे भी मिला हुआ है। उनका कहना है कि मामला उच्च न्यायालय में लंबित है और प्रशासन से कम से कम एक सप्ताह का समय मांगा गया था, लेकिन इसके बावजूद छुट्टी के दिन भी जल्दबाजी में कार्रवाई की गई।
लोगों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई सत्ता पक्ष के लोगों और प्रशासन की सांठगांठ का नतीजा है। उनका कहना है कि सरकारी जमीन को निजी बताकर दबाव बनाया जा रहा है।
वहीं जब पत्रकारों ने तहसीलदार राजेंद्र भारत से सवाल पूछे और नोटिस के तुरंत बाद कार्रवाई पर जवाब मांगा, तो उन्होंने मीडिया से बातचीत करने से इनकार कर दिया। आरोप है कि उन्होंने पत्रकारों से अभद्र व्यवहार करते हुए कहा — “जो लिखना है लिख लीजिए, मैं कोई बाइट नहीं दूंगा, मैं नियम अनुसार काम कर रहा हूं।”
अब इस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं — क्या प्रभावित परिवारों को पर्याप्त समय दिया गया? क्या कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत हुई? और क्या प्रशासन पर वास्तव में राजनीतिक दबाव था? फिलहाल इन सवालों पर बहस तेज हो गई है।









